*हम हैं तो सब है,,,,*
*हम होंगे तो सब होगा,,,,,,,।*
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सिलवानी जिला-रायसेन
साथियों रमज़ान का पाक महीना रोज़े रखने, नमाज़-क़ुरआन पढ़ने, सारी उम्मत के लिए दुआ करने व ज़कात करने के लिए होता है। ये सब्र, रहम, इंसानियत और प्यार का महीना है।
इस पाक माह में अगर हमें खरीदारी के लिए बाज़ार जाने को न मिले, सहरी व अफ्तार में थोड़ी कम वैरायटी खाने को मिले, मस्जिदों में तराबीह की जगह घर में ही इबादत करनी हो तो इसमें कोई तकलीफ की बात नहीं है क्योंकि इससे हमारी इबादत या हमारे यक़ीन पर राई बराबर भी फर्क नहीं पड़ने वाला।
हमें इस महामारी के माहौल में कोरोना के ख़िलाफ़, भूख के ख़िलाफ़ लेकिन इंसानियत के पक्ष में एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है चाहे अब इसके लिए हमें रमज़ानों की खुशियां और चहल-पहल घरों तक ही क्यों न सीमित रखनी पड़े या फ़िर ईद की नमाज़ घर ही में अदा करनी हो या फिर सिवईयों का आनन्द दोस्तों-रिश्तेदारों की जगह सिर्फ परिवार के साथ लेना पड़े.. लेकिन हम इंसानियत को ख़तरे में नहीं पड़ने देंगे क्योंकि कोई भी त्योहार हम जब तक हैं तब तक है अगर हम ही नहीं बचेंगे, हमारा मुल्क ही नहीं बचेगा तो कैसा त्योहार, कैसी खुशियां!! तो सब्र रखिये फल यक़ीनन मीठा ही होगए